Pushpa Laal Chandan: 'पुष्पा' फ़िल्म के लाल चंदन की हकीकत, लकड़ी के लिए क्यों तड़पता है चीन?

 

The Chopal,

Pushpa Movie Laal Chanadan : साऊथ सिनेमा में अल्लु अर्जुन के  दमदार अभिनय वाली फिल्म 'पुष्पा दी राइज' का खुमार लोगों पर छाया हुआ है. वहीं इस फिल्म के हिंदी समेत सभी वर्जन OTT पर रिलीज होने के बाद इसकी कामयाबी अब सिनेमाघरों से उतर कर लोगों के मोबाइल तक जा पहुँच चुकी है. पुष्पा फ़िल्म कहानी एक मजदूर पर टिकी है जो एक खास और कीमती किस्म की लकड़ी तस्करी के धंधे में उतरता है. परंतु क्या आप जानते हैं मजदूर पुष्पा को ताकतवर बनाने वाली इस खास किस्म की लकड़ी का आखिर राज क्या है आइये समझिए, 

Red Sanders यानि की लाल चंदन जिसको रक्त चंदन भी कहा जाता है. भारत में सिर्फ गिने-चुने स्थान पर पाई जाने वाली लाल चंदन की लकड़ी बेहद ही खास है. लाल चंदन का वैज्ञानिक नाम Pterocarpus santalinus है. रक्त चंदन यानि की लाल चंदन आंध्र प्रदेश के जंगलों में पाया जाने वाला पेड़ है, जिसके कारण काफी खूनखराबा भी हो चुका है. बता दें की खासकर चीन में इस पेड़ की बहुत ज्यादा मांग है, जिसके लिए तस्करी भी होती रही है. लाल चंदन के पेड़ों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स की तैनाती की गई है.

आंध्रप्रदेश की शेषाचलम पहाड़ियों में पाए जाने वाले रक्त चंदन (Red Sandal) के पेड़ को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है. रक्त चंदन में सफेद चंदन की तरह कोई सुगंध नहीं होती है. यह काफी गुणकारी होता है. औषधीय गुणों के साथ ही इसका इस्तेमाल त्वचा को निखारने के लिए भी किया जाता है.

लाल चंदन की लकड़ी की महंगे फर्नीचर, सजावट के काम के लिए बड़ी मांग है. और शराब व कॉस्मेटिक्स में भी इसका बड़ा इस्तेमाल किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी लकड़ियों की कीमत बहुत ज्यादा है. एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत भारत पर रक्त चंदन के पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है.

लाल चंदन कहां पाया जाता है, 

तमिलनाडु की सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के 4 जिलों- नेल्लोर, कुरनूल, चित्तूर, कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही रक्त चंदन के पेड़ उगते हैं. इस पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से लेकर 11 मीटर तक की होती है. इसका घनत्व काफी अधिक होता है और पानी में यह डूब जाती है. इसी कारण से लाल चंदन की लकड़ियों की पहचान है.

तस्करी करने पर 11 साल की सज़ा, 

बड़े पैमाने पर रक्त चंदन की तस्करी भी की जाती है. सवा 2 लाख हेक्टेयर में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों के कई हिस्सों में पाई जाने वाली इन खास लकड़ियों की तादाद 50 प्रतिशत तक कम हो गई है. लगभग 6 साल पहले 2015 में एनकाउंटर में 20 तस्करों की मौत भी हुई थी. इसके साथ बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. तस्करी करते पाए जाने पर 11 साल जेल की सजा का प्रावधान है.

वहीं लाल चंदन की लकड़ी सड़क, जल, वायु इन तीनों मार्गों से तस्करी की जाती है. पकड़े जाने से बचने के लिए कई बार पाउडर के रूप में भी तस्करी होती है. चीन, जापान, सिंगापुर, यूएई, आस्ट्रेलिया सहित अन्य कई देशों में इन लकड़ियों की डिमांड है. परंतु सबसे ज्यादा मांग चीन में है. स्मगलिंग भी सबसे अधिक यहीं होती है. फर्नीचर, सजावटी सामान, पारंपरिक वाद्ययंत्र गिटार आदि बनाने के लिए मांग अधिक है.