RBI ने रेपो रेट पर लिया फैसला, जानें आपकी लोन की EMI पर क्या असर होगा
TheChopal, New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से एक बार फिर से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई की ओर से लगातार दूसरी बार रेपो रेट को ज्यों का त्यों रखा गया है। रेपो रेट में बदलाव न होना भी कहीं न कहीं लोन उपभोक्ताओं के लिए राहत का कदम है। अब लोन ग्राहकों की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे ईएमआई का संतुलन पहले की तरह ही अब भी बरकरार रहेगा।
जानिए क्या होता है रेपो रेट
आसान भाषा में बात करें तो रेपो रेट एक प्रकार की ब्याज दर होती है। इस ब्याज दर पर ही RBI की तरफ से बैंकों को कर्ज दिया जाता है। RBI की तरफ से जब भी रेपो रेट कम की जाती है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। ऐसे में बैंकों की तरफ से भी अपने होम लोन व अन्य लोन को सस्ता किया जाता है। अगर रेपो रेट बढ़ाई जाती है तो लोन महंगा हो जाता है और लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
कितनी है रेपो रेट
आरबीआई की ओर से पिछली बार की तरह ही इस बार भी रेपो रेट को 5.25% रखा गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से जानकारी दी गई है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तरफ से यह फैसला लिया गया है। इससे एक बात तय हो गई है कि ग्राहकों को महंगे लोन की मार नहीं पड़ेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला
रेपो रेट में बदलाव न करने का फैसला कई कारकों को ध्यान में रखकर किया गया है। इसके पीछे का एक कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी है। वहीं, पश्चिमी एशिया का तनाव अभी कम नहीं हुआ है, जिससे महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एक और बोझ लोगों पर नहीं डाला गया है। हालांकि कुछ लोग मान रहे थे कि ईएमआई कम भी हो सकती है, लेकिन ईएमआई कम तो नहीं हुई, परंतु न बढ़ना भी एक लाभ ही है।
बढ़ सकती है घरों की डिमांड
रेपो रेट कम होने से या फिर स्थिर रहने से घरों की डिमांड में इजाफा हो सकता है। होम बायर्स अपने फाइनेंश के प्रति फैसले आसानी से ले सकते हैं। किसी का बजट नहीं बिगड़ रहा है। पहले से चली आ रही वित्त मैनेजमेंट के हिसाब से फैसले किए जा सकते हैं। इससे होम बायर्स को काफी लाभ होगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
आर्थिक मामलों के जानकार शिवांक रावल का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से एक समझदारी भरा फैसला लिया गया है। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय हालात और दुनिया भर में बनी अनिश्चितता के चलते यह सही समय पर लिया गया सही कदम है। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं और महंगाई का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे माहौल में रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए राहत की खबर है और इससे वित्तीय योजनाओं में स्थिरता बनी रहेगी।