जब भारत को 1 गांव के बदले पाकिस्तान को देने पड़े थे 12 गांव, जानिए यह थी बड़ी वजह,
आज शहीदी दिवस है आज के दिन ही (23 मार्च) राजगुरु, सुखदेव और भगतसिंह को फांसी दी गई थी. भारत एवं पाकिस्तान के लंबे समय से ही तनावपूर्ण माहौल रहा है. कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद आजादी के बाद के समय से ही शुरू हो गया. परंतु दोनों मुल्कों के तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद भी एक ऐसा गांव है, जिसके लिए भारत ने अपने 12 गांवों को पाकिस्तान को दे दिया था. भारत ने ऐसा क्यों किया इसके पीछे एक बड़ी वजह है आपको बतातें है,
भारत ने अपने 12 गांवों के बदले इस गांव को विशेष रूप से पाकिस्तान से इसलिए लिया, क्योंकि यहां शहीदों की निशानियां और देशवासियों की भावना जुड़ी हुई है. ये भारत के इतिहास से बेहद ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जगह है,
बता दें की अंग्रेजी अधिकारी यहां पहुंचे और उन्होंने बिना किसी रीति-रिवाज के शवों को जला दिया. फिर अवशेषों को जल्दबादी में सतलुज नदी में ही फेंक दिया गया. इसके बाद भारत- पाकिस्तान सीमा के नजदीक गांव हुसैनीवाला में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधियां को स्थापित किया गया. वहीं, जब देश का बंटवारा हुआ तो ये गांव पाकिस्तान के हिस्से में चला गया. इसके बाद देशवासियों की भावनाओं को ध्यान में रख भारत ने पाकिस्तान को सुलाईमान के हेड वर्क्स क्षेत्र में स्थित अपने 12 गांवों को सौंप दिया और इसके बाद हुसैनीवाला को ले लिया.