कर्मचारी की पेंशन पर High court का बड़ा फैसला, सरकार की याचिका हुई खारिज

 

High Court - पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को राहत देते हुए केंद्र सरकार (Central Government) की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने AFT चंडीगढ़ के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उन्हें दिव्यांगता पेंशन का लाभ देते हुए 30% दिव्यांगता को 50% मानकर पेंशन देने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ था और सेवा के दौरान बीमारी से ग्रस्त हो जाता है, तो इसे सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मेडिकल बोर्ड (medical board) की बिना ठोस आधार वाली रिपोर्ट के आधार पर सैनिक को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित (deprived of statutory rights) नहीं किया जा सकता।

2020 में हुए थे सेवानिवृत-

मामले के अनुसार लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह 10 दिसंबर 1984 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। भर्ती से पहले मेडिकल जांच में उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था। उन्होंने 36 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद 29 फरवरी 2020 को सेवानिवृत्ति ली।

सेवा के दौरान उन्हें “प्राइमरी हाइपरटेंशन” (उच्च रक्तचाप) की समस्या हुई, जिसके लिए मेडिकल बोर्ड ने 30% दिव्यांगता निर्धारित की थी। हालांकि बोर्ड ने इसे न तो सैन्य सेवा से संबंधित माना और न ही सेवा के कारण बढ़ा हुआ बताया। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने उन्हें दिव्यांगता पेंशन (disability pension) का पूर्ण लाभ देने से इनकार कर दिया था।

AFT ने दिया दिव्यांगता लाभ का फैसला-

अधिकारी ने इस मामले में सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) का रुख किया था। AFT ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए उन्हें दिव्यांगता पेंशन का लाभ देने और 30% दिव्यांगता को 50% मानकर राउंड ऑफ करने का आदेश दिया था। इस फैसले को केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि मेडिकल बोर्ड ने बीमारी को सैन्य सेवा से असंबंधित बताया है, इसलिए AFT का आदेश गलत है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का दिया हवाला-

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के ऐतिहासिक फैसले धर्मवीर सिंह बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि यदि भर्ती के समय किसी बीमारी का उल्लेख नहीं था, तो माना जाएगा कि सैनिक पूरी तरह स्वस्थ था और बाद में हुई बीमारी सेवा के दौरान विकसित हुई है। ऐसे मामलों में सैनिक को कानूनी लाभ दिया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा कि दिव्यांगता पेंशन पाने वाले सैन्यकर्मी को दिव्यांगता प्रतिशत का राउंड ऑफ लाभ देना अनिवार्य है, चाहे वह मेडिकल आधार पर सेवा से बाहर हुआ हो या सामान्य सेवानिवृत्ति पर। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि AFT के आदेश में कोई कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

इसी के साथ हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज (Central government's petition dismissed) कर दी और लेफ्टिनेंट कर्नल काला सिंह को 1 मार्च 2020 से 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन देने के आदेश को बरकरार रखा।