पशुपालकों के लिए इस नस्ल की भैंस है काला सोना, रोजाना देती है 25 लीटर तक दूध
Good Species Of Buffalo : भारत में डेयरी व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में अब युवाओं का रुझान भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर आप भी डेयरी बिजनेस के लिहाज से पशुपालन का सोच रहे है तो बेहद ही लोकप्रिय नस्ल की भैंस पालना सबसे बेहतर ऑप्शन हो सकता है। जानिए इसके बारे में.
High Milk Yielding Species Of Buffalo : भारत ना सिर्फ कृषि प्रधानदेश है, बल्कि पशुपालन में भी अग्रणी है। छोटे-बड़े किसान आज भी पशुपालन को प्रमुखता से अपनाते हुए चलते हैं। छोटे और सीमांत किसान जीवनयापन के लिए तो बड़े किसान और व्यवसायिक लिहाज से पशुपालन कर रहे हैं। यही कारण है कि पशुपालन में तेज वद्धि दिखाई दे रही है। पशुपालन एक उभरता हुआ स्वरोजगार का माध्यम बन रहा है जो ना सिर्फ लाभ, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है।
अब ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र के लोग एवं पढ़े-लिखे युवा भी इसके जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं। जिसमें वह गाय,भैंस, बकरी के साथ सूअर पालन का काम बड़े स्तर पर कर रहे हैं । भैंस पालन का काम करने वाले पशुपालकों को उन्नत नस्ल की जानकारी न होने के कारण उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसीलिए आज हम उन्हें भैंस की एक खास उन्नत नस्ल के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसका पालन करके वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
पशु विशेषज्ञ डॉ इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि मुर्रा नस्ल की भैंस 1 दिन में लगभग 22 से 25 लीटर तक दूध देती है। इसीलिए इसे बेहद अधिक दुग्ध उत्पादन वाली भैंस माना जाता है। जो एक ब्यांत में लगभग 2800 से 3000 हजार लीटर तक का दुग्ध उत्पादन देती है। यही कारण है कि इसे काला सोना भी कहा जाता है। वही इसे अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग नाम खुंडी, डेली के नाम से भी जाना जाता है।
पशुपालक मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। क्योंकि यह भैंस अपने कई खास गुणों के लिए जानी जाती है। यही वजह है कि पशु पालकों के लिए यह पहली पसंद बनी हुई है। मुर्रा नस्ल की भैंस अन्य भैंसों की तुलना में बेहद अलग होती है। इसीलिए इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है। यह भैंस अन्य भैंस की प्रजातियों की तुलना में सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन देने के लिए जानी जाती है।
मुर्रा नस्ल की भैंस के जलेबी आकर के छोटे सींग होते हैं। जिनमें नुकीलापन भी रहता है। इनके सिर ,पूंछ,और पैरों के बाल का रंग सुनहरा ,गर्दन व सिर पतली, स्तन भारी व लंबे होते हैं एवं नाक घुमावदार होती है,। जो इसे अन्य नस्ल की भैंसों से अलग पहचान दिलाती है। मुर्रा नस्ल की भैंस की उत्पत्ति मुख्य रूप से हरियाणा को माना जाता है। परंतु बढ़ते पशुपालन व्यवसाय की वजह से पंजाब, राजस्थान, बिहार ,उत्तर प्रदेश राज्य में भी मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन करके किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। वह बताते हैं कि बाजारों में यह भैंस लगभग 60 हजार रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक मिलती है।