Pilibhit News : 7 महीने पहले अटके यूपी के इस बाईपास का निर्माण कार्य हुआ शुरू

Pilibhit News :रेलवे विभाग के द्वारा टकनपुर बाईपास के निर्माण कार्य के लिए मेटेरियल भेजे जाने पर भी, काम करने वाली फर्म ने तकरीबन 7 महीने निकाल दिए, संस्था ने कहा था कि 1 महीने के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा.
 

The Chopal, Pilibhit News : रेलवे विभाग के द्वारा टकनपुर बाईपास के निर्माण कार्य के लिए मेटेरियल भेजे जाने पर भी, काम करने वाली फर्म ने तकरीबन 7 महीने निकाल दिए, संस्था ने कहा था कि 1 महीने के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा, जबकि 7 महीने बाद अब जाकर कार्य शुरू किया है इस बाईपास पर 114 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, काम बीच में अटके रहने की वजह से रोड पर अभी तक वाहनों का आना-जाना शुरू नहीं हुआ है.

शहर के बीच से गुजर रहे टनकपुर हाईवे से बड़े और भारी वाहनों के गुजरने से हमेशा शहरवासियों के लिए खतरा बना रहता है। इसी के चलते प्रदेश सरकार ने सन 2016 में 116 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर लंबे बाइपास के निर्माण को स्वीकृति दी।

इस बाइपास में टनकपुर और मैलानी रेलखंड के दो ओवरब्रिज भी प्रस्तावित हैं। बाइपास के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग ने 62 करोड़ की लागत से सड़क का निर्माण पूरा करा लिया, लेकिन दोनों रेल खंडों पर ओवरब्रिज का निर्माण राज्य सेतु निगम नहीं करवा पाया।

इसमें 607 मीटर लंबे एक ओवरब्रिज का निर्माण दिसंबर 2020 में पूरा होना था तो इतनी ही लागत से दूसरे ओवरब्रिज का निर्माण भी होना था। ऐसे में दोनों ओवरब्रिज की सर्विस रोड का निर्माण पूरा करा दिया गया लेकिन गर्डन नहीं मिल पाने से ट्रैक के ऊपर ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हो सका।

लंबे इंतजार के बाद रेलवे ने अक्तूबर 2023 में कार्यदायी संस्था को गर्डर सौंप दिए। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने दावा किया कि अब दो माह के अंदर कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बावजूद इसके लेट लतीफी के चलते निर्माण शुरू नहीं हो सका। अब जाकर लंबे इंतजार के बाद फिलहाल निर्माण शुरू हुआ है। एक बार फिर दो माह के अंदर कार्य पूरा करने का दावा किया जा रहा है।

दो साल में होना था कार्य पूरा लग गए नौ साल

बाइपास का निर्माण शुरू होने के बाद फरवरी 2019 में दोनों ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2020 तक पूरा होना था। लेकिन पहले कोरोना और बाद में रेलवे और पीटीआर की दखलअंदाजी से निर्माण रुका रहा। आलम यह है कि दो साल में पूरा होने वाला काम नौ साल बाद भी आज तक अधूरा है।

बिना सेफ्टी काम करते हैं श्रमिक

ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए भले की गर्डर रखने का कार्य शुरू कर दिया गया हो। मगर कार्यदायी संस्था सुरक्षा को लेकर पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है। मैैलानी रेलखंड पर बृहस्पतिवार को ओवरब्रिज पर गर्डर रखने के दौरान कोई भी कर्मचारी सेफ्टीकिट में दिखाई नही दिया। रेलवे की ओर से गर्डर मिलने में देरी हुई थी। बाद में ट्रैक के ऊपर काम करने के लिए अनुमति देरी से मिली। अब रोजाना कुछ घंटे का ब्लॉक ही मिल पा रहा है। इसी दौरान काम करना होता है। मई के अंत तक दोनों ओवरब्रिज का काम पूरा कर लिया जाएगा। बिना सेफ्टी किट के काम की बात गलत है, इसे दिखवाया जाएगा।