UP News : उत्तर प्रदेश के कनपुरिया बुकनू का पूरी दुनिया में बजेगा डंका, जीआई टैग पर बड़ी तैयारी
 

UP News : कनपुरिया बुकनू के स्वाद को पूरी दुनिया को देने की तैयारी जारी है। भारत को लोकप्रिय बनाने वाले पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने इस विषय पर खास चर्चा की। बातचीत के कुछ हिस्से नीचे पढ़ें।

 

Uttar Pradesh : अब कानपुर के प्रसिद्ध बुकनू का स्वाद दुनिया को दिखाया जाएगा। सैडलरी के बाद बुकनू को भी जीआई टैग मिलेगा। शहर के इस विशिष्ट उत्पाद को न सिर्फ पूरे विश्व में लोकप्रियता मिलेगी, बल्कि व्यापक बाजार में भी लोकप्रियता मिलेगी। यह कहना है जीआई मैन ऑफ इंडिया (पद्मश्री) डॉ. रजनीकांत का। गुरुवार को शहर आए डॉ. रजनीकांत ने कहा कि मोदी सरकार बौद्धिक संपदा के रूप में दुनिया को दिखाने में बहुत गंभीर है जो उत्पाद किसी जगह के नाम, इतिहास और भूगोल से संबंधित हैं।

ये पढ़ें - UP News: उत्तर प्रदेश में इन लोगों को इतनी मिलेगी पेंशन, योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला 

आपको बता दे की 2003 में अटल बिहारी सरकार ने जीआई टैग कानून को सदन में पारित किया था, यह पद्मश्री ने अपने अखबार हिंदुस्तान से विशेष बातचीत में बताया। यदि आजादी के बाद ही यह कानून लागू होता, तो भारतीय उत्पादों का नाम विश्व भर में फैल गया होता। उनका कहना था कि टैग लगाना भारत में बौद्धिक संपदा का कानूनी दर्जा देता है। स्थानीय उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने मदद मिलती है।

मेरठ की गजक और मलवां का पेड़ा भी सम्मानित होंगे  

GII टैग भी मलवां का पेड़ा, मेरठ की गजक, अलीगढ़ के इगलास का चमचम और फरुर्खाबाद की फुलवा आलू को मिलेगा। प्रयत्न निरंतर हैं। बुलंदशहर की खुरचन मिठाई सहित राज्य के 20 और उत्पादों को पहचान दी जाएगी। 

प्रदेश के 54 उत्पादों में से 21 को टैग किया जाएगा 

डॉ. रंजनीकांत ने बताया कि देश में 500 व प्रदेश में 54 उत्पादों को जीआई टैग मिला है। प्रदेश के 54 उत्पादों में से 21 वाराणसी क्षेत्र के हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण हैं बनारसी साड़ी, बनारसी पान, लंगड़ा आम, लकड़ी का खिलौना, गुलाबी मीनाकारी और भदोही की कालीन। उनका कहना था कि अप्रैल तक 21 अतिरिक्त उत्पादों को जीआई दर्जा मिल जाएगा। दार्जिलिंग चाय देश में जीआई टैग है, जबकि बनारसी साड़ी प्रदेश में है। 

क्या भूगोलिक संकेतक या जीआई टैग है?  

भौगोलिक संकेत, या जीआई टैग, एक दर्जा है जो एक विशिष्ट क्षेत्र से संबंधित उत्पाद को दिया जाता है। उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति अक्सर उसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और अन्य विशेषताओं पर निर्भर करती है। स्थानीय उत्पादों को चेन्नई की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने टैग दिया है। हर राज्य अपने उत्पादों को जीआई टैग देता है। किसी उत्पाद को दस वर्ष का टैग दिया जाता है। फिर आपको अपडेट करना होगा। 

कानपुर से ली मास्टर डिग्री, 102 उत्पादों को पहचान

2019 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. रजनीकांत मूल रूप से मिर्जापुर के निवासी हैं। डॉ. रंजनीकात, जो फिलहाल वाराणसी में रहते हैं, 1982-83 में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर से मास्टर डिग्री हासिल की। अब तक, वह सात राज्यों के 102 भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दे सका है। 2017 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पुरस्कार दिया था।

ये पढ़ें - UP की राजधानी आज झेलेगी बिजली संकट, कई इलाकों में आज होगी कटौती, दो लाख आबादी प्रभावित