UP के कानपुर में होगा 8 मंजिला इमारत का बस अड्डा, 143 करोड़ होंगे कायाकल्प पर खर्च
UP News : उत्तर प्रदेश के इस जिले में बस स्टैंड की सूरत कुछ समय बाद बदलने वाली है। इस बस स्टैंड को पीपीपी मॉडल के आधार पर 7 मंजिला की जगह 8 मंजिला बनाया जाएगा। इस बस स्टैंड पर निर्माण के चलते 3 साल तक बसों की आवाजाही बंद रहेगी।
Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के विभिन्न जिलों में बस स्टैंडों के आधुनिकीकरण के लिए प्रयासरत है। हालांकि, आपके द्वारा उल्लेखित 7 मंजिला से 8 मंजिला बस स्टैंड के निर्माण और इसके चलते 3 वर्षों तक बसों की आवाजाही बंद रहने वाली हैं। पूर्व में पांच एकड़ की जमीन पर बहुउद्देश्यीय इमारत बनाने की अनुमति दी गई थी। बाद में मेट्रो ने जमीन भी खरीद ली। अब फिर से ले-आउट बन रहा है, जो एक-दो हफ्ते में आ जाएगा। शुरू होने पर परियोजना की लागत 200 करोड़ तक पहुंच सकती है।
तीन महीने में कानपुर के झकरकटी बस अड्डा का रूप बदल जाएगा। यात्रियों को सुविधाएं देने वाली सात मंजिला बहुउद्देशीय इमारत अब पीपीपी मॉडल के तहत आठ मंजिला बनाई जाएगी। इसमें दो बेसमेंट भी होने वाले हैं। बस अड्डा निर्माण के लिए भी कंपनी चुनी गई है। बस अड्डा बनने में 143 करोड़ रुपये लागत आने वाली हैं। इस काम को पूरा होने में लगभग तीन वर्ष लगेंगे। इसलिए बसें यहां से अब नहीं चलेगी।
पंजाब की कंपनी सीगल कंस्ट्रक्शन को भी निर्माण कार्य का टेंडर मिल गया है। यहां कंपनी के अधिकारियों ने निरीक्षण किया है। साथ ही मंडलायुक्त के साथ तीन बार बैठक भी कर चुके हैं। बस अड्डे के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक पंकज तिवारी ने बताया कि निर्माण कार्य की वजह से झकरकटी से बसों का संचालन करीब तीन साल तक बंद रहेगा।
1000 बस हर दिन चलती हैं
इस दौरान सीओडी पुल जीटी रोड पर बस अड्डा ले जाएगा। यह जमीन कैंट बोर्ड से राज्य सड़क परिवहन निगम कानपुर परिक्षेत्र ने किराये पर ली है। बस अड्डा शुरू करने के लिए झकरकटी बस अड्डा बनाने वाली कंपनी भूमि समतलीकरण का काम करेगी। हर दिन झकरकटी बस अड्डे से 1000 बसों की आवाजाही होती है।
पीपीपी मॉडल पर बस अड्डे की तैयारी
यहां से बांदा, चित्रकूट, उरई, झांसी, कानपुर देहात, गोरखपुर, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, लखनऊ, दिल्ली और प्रयागराज तक बसें चलती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश की रोडवेज बसें भी आती हैं। बस अड्डे पर मेट्रो सेवा के लिए पहले ही कुछ जगह दी गई है। इससे बस पार्किंग की समस्या पैदा होती है। अब बस अड्डे को पीपीपी मॉडल पर बनाने की योजना है।
मेट्रो ने पहले जमीन अधिग्रहण की, फिर ले-आउट बनाया
पूर्व में पांच एकड़ की जमीन पर बहुउद्देश्यीय इमारत बनाने की अनुमति दी गई थी। बाद में मेट्रो ने जमीन भी खरीद ली। अब फिर से ले-आउट बन रहा है, जो एक-दो हफ्ते में आ जाएगा। शुरू होने पर परियोजना की लागत 200 करोड़ तक पहुंच सकती है।
ये सुविधाएं होंगी
अन्य सुविधाओं में मॉल, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स, सुपर स्पेशियलिटी, यात्रियों के लिए वेटिंग रूम, खाना और किड्स जोन शामिल होंगे। यात्रियों के लिए बड़ी स्क्रीनों पर बसों के आने-जाने का समय और प्लेटफार्म भी दिखाया जाएगा।
अड्डे के किनारे बस शेड लगेंगे
बस अड्डे के किनारे शेड लगाए जाएंगे। यहां कई मार्गों की बसें आकर खड़ी होंगी। लंबी दूरी की बसों को अलग शेड मिलेगा, जबकि नजदीकी दूरी की बसों को अलग शेड मिलेगा। परिवहन अधिकारी लखनऊ, कानपुर देहात और दिल्ली जाने वाली अधिकांश बसों को ग्रीन सिटी बस अड्डे से चलाने की योजना बना रहे हैं। अड्डे का पूरा रूप बदल जाएगा बस। यहां बहुत सी सुविधाएं होंगी। आठ मंजिला इमारत में दो बेसमेंट होंगे। यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए भी क्लीनिक बनेगा। यह क्लीनिक एक निजी अस्पताल के रूप में कार्य करेगा। एक भाग मॉल में विकसित होगा। इस योजना पर काम ढाई से तीन महीने में शुरू हो जाएगा।

