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Cheetah in India: 8 चीतों ने भारतीय धरती पर 75 सालों रखा कदम, पढ़िए ताज़ा अपडेट
 

The Chopal, New Delhi: आज भारत के लोगों में खुशी क़ी लहर है क्योंकि चीतों को लेकर नामीबिया से ग्वालियर एयर बेस पहुंचने वाला विशेष विमान डेढ़ घंटा लेट हो गया है अब यह विमान बजे महाराजपुरा एयर बेस पर पहुंच चूका है. पुलिस, प्रशासन सहित बड़ी संख्या में सभी अफसर विमान का इंतजार कर रहे थे, विमान के भारत में आने पर अब यह मान लीजिये क़ी भारत में चीतों ने कदम रख दिया है.

8 चीते लाए गए, 

नामीबिया से लाए जा रहे 8 चीतों को शनिवार को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा जाएगा. कभी चीतों का घर रहे हिन्दुस्तान में आजादी के वक्त ही चीते पूरी तरह विलुप्त हो गए थे. 1947 में देश के आखिरी 3 चीतों का शिकार मध्य प्रदेश के कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने किया था. इसकी फोटो भी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी में है। उस दिन के बाद से भारत में कभी भी चीते नहीं दिखे। अब 75 साल बाद आठ चीतों को नामीबिया से लाया जा रहा है।

कब विलुप्त हुए चीते,

बता दें क़ी 1947-1948 की है. बताया जाता है कि तब देश के आखिरी 3 चीतों का शिकार हुआ था. मध्य प्रदेश के कोरिया रियासत (अब छत्तसीगढ़ में) के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने ये शिकार किया था. कहा जाता है कि उस दौरान गांववालों ने राजा से शिकायत की कि कोई जंगली जानवर उनके मवेशियों का शिकार कर रहा है. तब राजा जंगल में गए और उन्होंने 3 चीतों को मार गिराया.

नामीबिया से आ रहे ये 8 चीते

दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया से आ रहे चीतों में 5 मादा और 3 नर हैं. चीतों की उम्र ढाई से साढ़े पांच साल के बीच है. वहीं, ये जानकारी भी सामने आई है कि आठ चीतों में 2 सगे भाई भी शामिल हैं.

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