राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक सफर बनेगा मजेदार, हजारों हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहण
MP News: परियोजना भारतमाला योजना के तहत प्रस्तावित है, लेकिन पिछले करीब ढाई वर्षों से एलाइनमेंट को लेकर अटकी हुई है। किसानों के विरोध और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जटिलताओं के चलते काम आगे नहीं बढ़ पाया है।
Madhya Pradesh News: मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इस परियोजना को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अहम दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल प्रोग्रेस-वे चंबल अंचल के सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा और इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
अटल प्रोग्रेस-वे राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तीन राज्यों को जोड़ने वाली एक बड़ी सड़क परियोजना है। प्रस्ताव के अनुसार यह एक्सप्रेस-वे राजस्थान के कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई–बड़ोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) से शुरू होकर मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के निनावा तक बनाया जाना है। इसके निर्माण से कोटा, भिंड और इटावा के बीच सीधी, सुगम और कम दूरी की कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
ढाई साल से अटका प्रोजेक्ट, एलाइनमेंट बना बाधा
यह परियोजना भारतमाला योजना के तहत प्रस्तावित है, लेकिन पिछले करीब ढाई वर्षों से एलाइनमेंट को लेकर अटकी हुई है। किसानों के विरोध और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जटिलताओं के चलते काम आगे नहीं बढ़ पाया है। इससे प्रभावित जिलों के लोगों और किसानों में असंतोष और चिंता बढ़ती जा रही है।
कुल 404 किलोमीटर लंबे अटल प्रोग्रेस-वे में मध्यप्रदेश का हिस्सा सबसे बड़ा है। एमपी में लगभग 313.81 किलोमीटर, राजस्थान में 72 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश में करीब 22.96 किलोमीटर लंबाई का निर्माण प्रस्तावित है। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत लगभग 6,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन समय के साथ यह बढ़कर करीब 23,645 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
हजारों हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत
परियोजना के लिए वन विभाग और निजी किसानों की बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार, वन विभाग की करीब 454.51 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है। श्योपुर जिले में ही कुल 598.321 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जिसमें 90.878 हेक्टेयर सरकारी और 507.443 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है।
भिंड जिले में 29 ग्राम पंचायतों के 41 गांव इस परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि श्योपुर जिले के 57 गांवों से होकर यह एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। जिले की सीमा में करीब 95 किलोमीटर लंबाई का हिस्सा प्रस्तावित है।
यात्रा समय में 5 घंटे की बचत
अटल प्रोग्रेस-वे के निर्माण से इटावा से कोटा तक की यात्रा में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। फिलहाल यह सफर लगभग 11 घंटे का है, जो एक्सप्रेस-वे बनने के बाद करीब 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। यानी यात्रियों को लगभग 5 घंटे की समय बचत होगी। यह मार्ग चार लेन का होगा, जिससे यातायात तेज और सुरक्षित बनेगा।
किसानों के विरोध के बाद बदली गई योजना
भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में जब खेतों से होकर एक्सप्रेस-वे निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब किसानों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने घोषणा की थी कि खेतों की बजाय बीहड़ क्षेत्रों से होकर नया एलाइनमेंट तैयार किया जाएगा। हालांकि इस घोषणा के बाद भी परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई और काम ठप सा हो गया।
मुख्यमंत्री ने दिए सहमति से काम के निर्देश
मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया किसानों और स्थानीय निवासियों की सहमति और संतुष्टि के साथ पूरी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए सभी अड़चनों का समाधान किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल प्रोग्रेस-वे से मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले राजस्थान के दिल्ली–वड़ोदरा एक्सप्रेस-वे और उत्तर प्रदेश के आगरा–लखनऊ हाईवे से सीधे जुड़ेंगे। इससे कोटा, दिल्ली, मुंबई, आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों से चंबल अंचल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके परिणामस्वरूप उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बैठक में अटल प्रोग्रेस-वे के दो वैकल्पिक प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह मौजूद रहे।

