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कॉटन की कीमतों में जबरदस्त उछाल भाव 9600 पार, आगे रहेगी मंदी या तेजी जानिए
 

The Chopal, Kissan Samachar 

Cotton News 2022 : खरीफ फसलों की कीमत को लेकर किसान अभी भी असमंजस में है. पहले किसानों का मानना था कि सोयाबीन के दाम बढ़ेंगे, इसलिए किस कीमतों में तेजी के बावजूद बाजार में सोयाबीन की आवक नहीं बढ़ी. वहीं अब कपास के किसान स्टॉक पर जोर दे रहे है. कपास में 10000 भाव मिलना चाहिए ऐसा जानकारों का अनुमान है. ऐसी उम्मीद किसानों ने रखी है. खरीफ फसलों की कीमत को लेकर इस साल किसानों के मन में लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है. पहले किसानों का मानना था कि सोयाबीन की कीमत बढ़ेगी इसलिए तेजी के बावजूद बाजार में सोयाबीन की आवक नहीं बढ़ी. कपास के मामले में हालांकि यह तस्वीर अंतिम चरण में देखी जा रही है.

अगर ताज़ा हालात की बात करें तो राजस्थान की गोलुवाला मंडी में नरमा आज 9609 रुपए बिका, वर्तमान में औसत कीमतें 9 हजार के आसपास बनी हुई है. उत्पादन में गिरावट और बढ़ती मांग के कारण भविष्य में कपास की कीमतें बढ़ेगी. नतीजन उत्तर भारत में कॉटन की आवक पर खासा ध्यान दिया जा रहा है. किसानों ने बिना अपेक्षित भाव के कॉटन नहीं बेचने का फैसला कर रहे हैं.

किसान स्टॉप पर दे रहे ध्यान

इस साल कॉटन के रकबे में तेजी से गिरावट आई थी. जबकि सोयाबीन का रकबा बढ़ा. बारिश से फसलों को हुए नुकसान के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है. सीजन की शुरूआत में कॉटन की कीमत 78 रुपए प्रति क्विंटल थी. वर्तमान में कॉटन की कीमत 9000 से 9600 प्रति क्विंटल बनी हुई है. लेकिन किसानों को 10 हजार की दर की उम्मीद है. इसलिए अब भंडारण पर जोर दिया जा रहा है.

कपास की स्थिति सोयाबीन के समान

सीजन की शुरुआत से ही सोयाबीन की कीमतों में गिरावट आ रही है. दिवाली के बाद सोयाबीन की कीमतों में तेजी आई है. किसानों ने सोयाबीन को कम दाम पर नहीं बेचा. परंतु सोयाबीन के भंडारण पर जोर दिया जा रहा है. नतीजा सोयाबीन 4500 पर पिछले सप्ताह तक था और 6200 के ऊपर है दरों में वृद्धि के बावजूद किसान भंडारण पर अधिक से अधिक जोर देने की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन अब सोयाबीन की कीमतें गिर रही है आमदनी बढ़ रही है. कपास उच्च दरों की प्रत्याशा में समान स्थिति में नहीं होना चाहिए.

किसानों को कॉटन भाव 10 हजार तक उम्मीद 

इस साल उत्पादन पर अधिक हुए होने के बावजूद बारिश के कारण किसानों को अपेक्षित फसल नहीं मिली है. ऐसे में किसान अपनी उपज के उचित दाम की उम्मीद कर रहे हैं. कॉटन की आवक बढ़ने से कीमतों में तत्काल गिरावट आई है. इसलिए किसानों को कीमतों वृद्धि की उम्मीद है. नतीजे उत्तर भारत के बाजारों में कॉटन की आवक फिलहाल कम होती दिख रही है.