Haryana News : पंचायतें खुद संभालेंगी वाटर सप्लाई, MOU हुआ साइन
Haryana News : ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को बेहतर करने के लिए पंचायतें भी अब अहम कदम उठा रही हैं। दरअसल, जिन गांवों में पानी की चोरी, लिकेज या गंदा पानी जैसी समस्याएं हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसका समाधान ग्राम पंचायतें करेंगी। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालन सही से करने के लिए बरवाला खंड की दो पंचायतों ने बड़ा फैसला लिया है। चलिए जानते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में जिले की दो पंचायत में बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, बरवाला खंड की ग्राम पंचायत ढाड और ज्ञानपुरा अब अपने गांव की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का संचालक और रखरखाव खुद करेंगी। इसके लिए दोनों पंचायत ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के साथ एक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नीति को लागू करने वाली जिले की ही पहले दो पंचायती बन गई है।
MOU हुआ साइन
ढाड की महिला सरपंच सुमन और ज्ञानपुरा के सरपंच श्रवण ने इस पहल की कमान संभाली है। MOU की शर्तों के मुताबिक, रोजाना के छोटे-मोटे खर्चे लीकेज सही करना और वॉल्व बदलना जैसे काम पंचायत अपने स्तर पर कराएगी। अगर वाटर वर्क्स में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आती है तो जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मदद करेगा।
महिलाओं की रहेगी सबसे बड़ी भूमिका -
ग्रामीण स्तर पर इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए विलेज वॉटर एंड सैनिटेशन कमेटी (Village Water and Sanitation Committee) बनाई गई है। ढाड की महिला सरपंच सुमन ने बताया है कि पानी के प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है। इनको जिम्मेदारी दी जा रही है।
बनाए गए नए नियम -
ग्राम पंचायत पेयजल आपूर्ति व्यवस्था (drinking water supply system) को सही तरीके से संचालित करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। गांव में पानी कब कितना और किस समय छोड़ना है यह पंचायत तय करेगी। पाइपलाइन नेटवर्क की निगरानी खुद ग्रामीण रखेंगे। जिससे पानी की चोरी और लीकेज रुकेगी।
अब तुरंत होगा शिकायतों का निपटारा -
वाटर वकर्स के पंपों का संचालन और बिजली तकनीकी खराबी के काम पंचायत के अधीन होंगे। पानी ने आने या गंदा पानी आने की शिकायतों के लिए अब जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। इस समस्या का समाधान पंचायत स्तर पर तुरंत किया जाएगा।
ग्रामीणों से वसूला जाएगा न्यूनतम उपभोक्ता शुल्क -
इस नीति के तहत पंचायत को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति के सुचारू संचालन के लिए पंचायत ग्रामीण से न्यूनतम उपभोक्ता शुल्क (Minimum User Charge) वसूल करेंगे। जिससे स्थानीय स्तर पर ही ऑपरेटर का वेतन और बिजली बिल का भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा। इसके अलावा सरकार की ओर से भी शुरुआती चरण में रखरखाव अनुदान का प्रावधान किया गया है।
ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस पॉलिसी 2026 (Operation and Maintenance Policy 2026) के तहत पेयजल व्यवस्था को ग्राम पंचायत को दिए जाने का फैसला लिया गया। इसके तहत बरवाला को ग्राम पंचायत के साथ एमओयू हुआ अभी 18 ग्राम पंचायत के शामिल होने की प्रक्रिया चल रही है। यह पंचायतें भी जल्द इसमें शामिल हो जाएंगी।

