हरियाणा की पहली नेमोटोड जांच लैब सिरसा में होगी स्थापित, 11 जिलों के किसानों को मिलेगा फायदा
Sirsa News: हरियाणा के अलग-अलग 11 जिलों के किसानों के लिए राहत की खबर आ रही है। फल एवं सब्जियों में जड़ रोगों की वैज्ञानिक जांच के लिए राज्य की पहली नेमोटोड एनालिसिस लैब सिरसा में स्थापित की जाएगी।
इस लैब की स्थापना के बाद फल एवं सब्जियों की जड़ों और मिट्टी की जांच कर नेमोटोड बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। यह रोग पौधों की जड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए इसे जड़ों का कैंसर भी कहा जाता है। बीमारी के कारण पौधों की जड़ें बंध जाती हैं और उनकी ग्रोथ रुक जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
नेमाटोड मिट्टी में पौधों की जड़ों को पहुंचाते हैं नुकसान
वैज्ञानिकों के अनुसार नेमाटोड मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म, धागेनुमा परजीवी कीड़े होते हैं, जो पौधों की जड़ों में प्रवेश कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। ये जड़ों से पानी और पोषक तत्व चूस लेते हैं, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और पैदावार में भारी कमी आती है। यह समस्या खासकर ग्रीन हाउस खेती वाले क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है। नई लैब बनने के बाद मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर बीमारी की रोकथाम के उपाय पहले से किए जा सकेंगे। इस सुविधा से रोहतक, झज्जर, चरखी दादरी, रेवाड़ी, नारनौल (महेंद्रगढ़), हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, जींद और भिवानी जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
नेमोटोड लैब के लिए भेजा प्रस्ताव
सरकार के निर्देशानुसार भेजा है नेमोटोड लैब का प्रस्ताव नेमोटोड रोग मिट्टी में पाया जाता है और यह पौधों की जड़ों को प्रभावित करता है। सरकार के निर्देशानुसार नेमोटोड लैब का प्रस्ताव भेजा गया है, जो प्रदेश की पहली ऐसी लैब होगी। जिससे मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर बीमारी की रोकथाम के प्रभावी उपाय किए जा सकेंगे।" -दीक्षा तिन्ना, वैज्ञानिक
अधिकारी, गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला सिरसा।

