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कपास की आवक में कमी, क्या भविष्य में बढ़ सकतें हैं कॉटन के भाव? जानें तेजी-मंदी की रिपोर्ट

 

The Chopal, New Delhi: देश के कपास (Cotton) उत्पादक राज्यों में नए सीजन का 1 माह बीत जाने के बावजूद आवकों में सुधार नहीं हो रहा है. शनिवार को लगभग 30000 गांठों की आवक नज़र आई. इसके बावजूद कपास का भाव सुधार की तरफ नहीं है. उत्तर भारत की मंडियों में सीजन से पहले 12 हजार के स्तर पर होने वाला कारोबार 8100 से 8600 पर आ गया है. जिनिंग मिलें कपास की आपूर्ति को लेकर संकट का सामना कर रही है.

लेकिन आगे स्पिनिंग मिलों की मांग ना होने से किसानों को उनके दाम देने को तैयार नहीं है. स्पिनिंग मिलों के पास रुई का स्टॉक बढ़ रहा है. लेकिन भाव न बढ़ने के कारण हर स्तर का बाजार ठंडा दिखाई दे रहा है. रविवार को भी उत्तर भारत के कुछ मंडियों में नरमे का भाव अधिकतम 8350 रुपए प्रति क्विंटल तक दिखाई दिया. गुजरात में कपास का भाव 1400 से 1825 रूपये प्रति 20 किलो के स्तर पर दर्ज हुआ.

जबकि मध्यप्रदेश में 5500 से 7800 रूपये प्रति किवंटल के बीच बोला गया. महाराष्ट्र में कपास का भाव 6 हजार से लेकर 8 हजार के बीच चल रहा है. लेकिन यहां आवक 5 हजार गांठ से आगे नहीं बढ़ रही है. कर्नाटक में कपास का भाव 8300 से लेकर 8900 तक बोला जा रहा है. रुई के दाम भी लगातार गिरावट की तरह बढ़ चले हैं. तेलंगाना में 30 एमएम रुई लगभग 64500 रुपए पर कारोबार कर रही है.

जबकि गुंटूर में रुई का भाव 66500 रुपए तक है. कर्नाटक में भी यही क्वालिटी 65200 पर बोली जा रही है. महाराष्ट्र के जलगांव में 30 एमएम रुई 65 हजार रुपए प्रति कैंडी बोली गई. अलवर, खैरथल, बहरोड लाइन पर 28.5 एमएम रुई 61 हजार रूपए और गुजरात में रेडी हुई का भाव 65 हजार रुपए प्रति कैडी है. जानकारों का कहना है कि जल्द ही कपास की फसल में पोल आती दिखाई देगी और बाजार सुधार की दिशा में आगे बढ़ेगा. हरियाणा पंजाब में नरमा की फसल बेहद कमजोर है और बाकी राज्यों में भी उत्पादन संतोषजनक नहीं है.

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