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राजस्थान : जोधपुर, नागौर समेत 5 जिलों से गुजरेगा 6 लेन एक्सप्रेस-वे, हेलिपैड, चार्जिंग भी सुविधाएं मिलेंगी
 

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Amritsar-Jamnagar economic corridor : देश का अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे सबसे लंबे इकॉनोमिक कॉरिडोर में से एक है. 1224 किलोमीटर लम्बाई के इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा यानि की 636 किमी राजस्थान से गुजरेगा. यह एक्सप्रेसवे राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर से गुजरेगा. यह एक्सप्रेस-वे पंजाब, हरियाणा, गुजरात समेत देश की 3 बड़ी रिफाइनरी व 3 पोर्ट आपस में जोड़ेगा. करेगा. यह देश का दूसरा 6 लेन एक्सप्रेस-वे है.

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे ( Amritsar-Jamnagar Expressway ) देश के सबसे लंबे इकॉनोमिक कॉरिडोर में से एक है. इसका निर्माण भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत जारी है. निमार्णाधीन 1224 किमी लंबे इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा पार्ट 636 किमी राजस्थान से गुजर रहा. अमृतसर-जामनगर सिक्सलेन ग्रीनफील्ड नेशनल हाईवे राजस्थान की उत्तर से पश्चिमी सीमा से निकल रहा है. यह ऐसा आर्थिक कॉरिडोर है जो देश की 3 रिफाइनरी पंजाब की भटिंडा एवं गुजरात की जामनगर और बाड़मेर रिफाइनरी को जोड़ेगा.

जानकारी बता दें की अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे पंजाब, हरियाणा, गुजरात को आपस में जोड़ेगा. इस एस्प्रेस-वे से 7 राज्य, देश की 3 बड़ी रिफाइनरी व 3 पोर्ट भी जुड़ेंगे. यह देश का दूसरा सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे है, जिस पर इंटरचेंज या वे साइट के पास हेलिपेड बनाए जाएंगे. इसके लिए NHAI ने 20 से 25 साइट चिह्नित किए हैं. अकेले राजस्थान में 14 से ज्यादा साइट हैं. भारत माला प्रोजेक्ट के तहत फरीदकोट, भटिंडा, अबोहर, गंगानगर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, पचपदरा, सांचौर, राधनपुर, जामनगर तक कुल 1316 किमी ग्रीन फील्ड हाईवे बनेगा.

वहीं सड़क हादसे रोकने के लिए एक्सप्रेस-वे पर डिजिटल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जा रहा है. 1224 किमी में 6 से 7 हजार सीसीटीवी कैमरे लगेंगे. अगर गाड़ी 100 की स्पीड से ऊपर गई और पकड़ में आ सकेंगे. हर 1 किमी की दूरी पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स सिस्टम होगा. कॉल करते ही एम्बुलेंस, हाइवे पेट्रोल उस लोकेशन पर तुरंत पहुंच जाएगी.

बता दें की इस कोरिडोर का 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चूका है. इस पर 120 किमी की स्पीड से वाहन दौड़ेंगे. एक्सप्रेस-वे पर पहली बार 16 साइड-बे ट्रॉमा सेंटर, हर 40 किमी पर इलेक्ट्रिक चार्जर भी उपलब्ध होंगे. टोल एक्सप्रेस-वे से उतरने पर लगेगा. इंटरचेंज या वे साइट के पास हेलिपैड बनाए जाएंगे. इसका इस्तेमाल सेना भी कर सकेगी. एक्सप्रेस-वे के नजदीक बने हेलिपेड का उपयोग इमरजेंसी के दौरान किया जाएगा.