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खरगोन जिले में अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर कपास की बुआई करेंगे किसान, अपनाएं ये टिप्स

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खरगोन जिले में अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त पर कपास की बुआई करेंगे किसान, अपनाएं ये टिप्स

Khargone Cotton Farming: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में गेहूं और चना की कटाई 95% पूरी हो चुकी है. इसके बाद किसान खरीफ फसल की तैयारी कर रहे हैं. खाली हुए खेतों को तैयार किया जा रहा है. जिलेभर के किसान बड़े पैमाने पर कपास की खेती करते हैं. क्योंकि ज्यादातर बार कपास की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा होती है. 

यहां कपास की बुवाई मई और जून के महीने में होती है. लेकिन आने वाले दिनों में गर्मी को देखते हुए किसान अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त के दौरान कपास फसल की बुआई करना पसंद करते हैं. कई बार कपास की आगे की खेती का किसानों को फायदा मिल जाता है. क्योंकि ज्यादा लेट बुवाई करने पर कपास के छोटे पौधों को लु और गर्मी का सामना करना पड़ता है.

अकेले खरगोन जिले में लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के आसपास किसान बीटी कॉटन की बुआई करते हैं. खरगोन सबसे बड़ा कपास उत्पादक जिला होने के कारण यहां की स्थानीय मंडी में लगातार सफेद सोना यानी कि कपास की आवक निरंतर बनी रहती है. कुछ पैमाने में यहां के कपास की गुणवत्ता भी अच्छी होती है.

कपास की खेती को लेकर किसानों का कहना है की अच्छी पैदावार के लिए सही समय पर खेत की तैयारी होनी चाहिए. बुवाई से पहले अगर खेत की जुताई अच्छी हो तो फसल बेहतर होती है जिससे उत्पादन बढ़ता है. जिले के कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने बताया कि किसानों को खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवा लेना चाहिए. जिससे पता चल जाता है की मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी है. इस रिपोर्ट के आधार पर खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. जिससे खर्च भी काम होगा और फसल भी अच्छी होगी. 

कपास की बुवाई करने से पहले खेत की मिट्टी की गहरी जुताई करनी चाहिए जिससे उसमें खरपतवार की जड़े नष्ट हो जाती है. साथ ही नई मिट्टी से हवा का संचार भी हो जाता है.