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कर्नाटक विवाद को लेकर दायर हुई एक और याचिका, जाने किन बातों का हुआ जिक्र

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High court
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कर्नाटक| कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं आज यानी शनिवार के दिन राष्ट्रीय एकता को कायम रखने के उद्देश्य को लेकर आपसी भाईचारे की और ध्यान केंद्रित करते राष्ट्रीय अखंडता बनाए रखने हेतु एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। इस याचिका में कहा गया है की स्कूल और कर्मचारियों के लिए समान पोशाक सहिंता लागू करके केंद्र व राज्य सरकार को इस मामले पर त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए।
बता दे इस मामले को लेकर शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने अन्य मामलों के साथ इस मामले की कार्यवाही की थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने कहा, हम सभी के संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस मामले की जल्द ही कार्यवाही करेंगे। वहीं उच्च न्यायालय की तरफ से जारी अंतरिम आदेश में कहा गया है की स्कूलों को खोला जाए। 
बता दें हाईकोर्ट ने स्कूलों को खोलने का निर्देश देते हुए कहा था की जब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं आता तब तक बिना किसी धर्मिक विवाद के बढ़ावा के साथ स्कूलों को खोला जाएगा। अश्विनी उपाध्याय और अश्विनी दुबे के जरिये निखिल उपाध्याय द्वारा दायर नयी जनहित याचिका में केंद्र सरकार को एक न्यायिक आयोग अथवा विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है, जो सामाजिक और आर्थिक न्याय, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के मूल्यों को सिखाने तथा विद्यार्थियों के बीच भाईचारा, सम्मान, एकता और राष्ट्रीय अखंडता को बढ़ावा देने के उपाय बताए।
जाने क्या कहा गया याचिका में:-
दायर याचिका में कहा गया है की शैक्षणिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक स्थान हैं और ये ज्ञान एवं बुद्धिमता के इस्तेमाल, अच्छे स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए हैं, न कि जरूरी और गैर-जरूरी धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए। याचिका में आगे कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने के लिए सभी स्कूल-कॉलेजों में समान पोशाक संहिता लागू करना बहुत जरूरी है, अन्यथा कल नागा साधु आवश्यक धार्मिक प्रथा का हवाला देते हुए महाविद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं और बिना कपड़ों के कक्षा में शामिल हो सकते हैं।