The Chopal

बिहार में 315 किमी. लंबी रेल लाइनें भरेगी किसानों की तिजोरी, जमीन अधिग्रहण बदले दी जाएगी मोटी रकम, बनेगें 40 नए स्टेशन

Bihar News :बिहार में रेलवे और सड़क परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना से राज्य में कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और कई नई रेल लाइनों का विस्तार होगा। इस रूट पर आने वाले गांव की जमीनों की कीमतों में तगड़ा उछाल आने वाला है। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मोटी रकम दी जाएगी।

   Follow Us On   follow Us on
बिहार में 315 किमी. लंबी रेल लाइनें भरेगी किसानों की तिजोरी, जमीन अधिग्रहण बदले दी जाएगी मोटी रकम, बनेगें 40 नए स्टेशन

Bihar News : बिहार में रेलवे और सड़क परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना से राज्य में कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और कई नई रेल लाइनों का विस्तार होगा। इस रूट पर आने वाले गांव की जमीनों की कीमतों में तगड़ा उछाल आने वाला है। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मोटी रकम दी जाएगी।

315 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन

बिहार में रेलवे सड़क परिवहन को मजबूती देने के लिए सरकार की तरफ से एक और बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार में इस रेलवे प्रोजेक्ट के जरिए रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। प्रदेश में कई नई रेल लाइन प्रस्तावित है। बिहार में 315 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछाई जानी वाली है। बिहार का अन्य राज्यों से आवागमन आसान होने वाला है। इस रूट पर आने वाले गांव की जमीनों की कीमतों में तगड़ा उछाल आने वाला है। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मोटी रकम दी जाएगी।

बिहार में बिहटा-औरंगाबाद नई रेलवे लाइन, विक्रमशिला-कटारिया नई डबल लाइन रेलवे लाइन, सुगौली-वाल्मीकिनगर रेलवे लाइन और सुल्तानगंज-देवघर रेलवे लाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। 120 किलोमीटर बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन और विक्रमशिला-कटारिया न्यू डबल लाइन रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण करना होगा, जिसके लिए सरकार काफी धन खर्च करेगी। आइए जानते हैं कि ये दोनों मार्ग कब तक तैयार होंगे और यह लाइन किन शहरों से गुजरेगी।

रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी जोर 

बिहार में रेल सड़क परिवहन को मजबूत करने के साथ रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी जोर दिया जा रहा है। राज्य में कई नई रेल परियोजनाओं का प्रस्ताव है। बिहटा-औरंगाबाद के बीच एक नई रेल लाइन बनाने के लिए रेल मंत्री ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने की अनुमति दी है। इसके अलावा, विक्रमशिला-कटारिया के बीच एक नई डबल लाइन रेलवे लाइन बनाने का भी बड़ा प्रोजेक्ट है।  बिहटा-औरंगाबाद के बीच प्रस्तावित 120 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का डीपीआर बनाने का अंतिम चरण तय किया जाएगा। इस दौरान, औरंगाबाद को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अनुग्रहण नारायण रोड से औरंगाबाद के बीच 13 किमी. लंबी नई रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। यह बिहटा-औरंगाबाग मध्य रेलवे लाइन का एकमात्र हिस्सा है।

बिहटा-औरंगाबाद रेलवे परियोजना की लागत

बिहटा-औरंगाबाद रेलवे परियोजना का निर्माण करने में 440 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस परियोजना को वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान 42.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना हैं। इस मार्ग पर जमीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि होगी। किसानों को उनकी जमीन के लिए बड़ी राशि दी जाएगी, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। इस परियोजना से पटना से औरंगाबाद की दूरी सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरी होगी। इस दौरान 1414 स्टेशन बनाए जाएंगे।

सुल्तानगंज-देवघर रेलवे लाइन में बदलाव

इसके अलावा, दो दशक पहले शुरू की गई सुल्तानगंज-देवघर रेल लाइन को फिर से शुरू करने की योजना भी बनाई गई है। इस पंक्ति के लिए 2000 से 2001 तक वाजपेयी सरकार ने जमीन अधिग्रहण की और जमीन मालिकों को भुगतान किया। लेकिन, ठंडे बस्ते पर पड़े इस परियोजना को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है। 59 किलोमीटर लंबी लाइन को बिछाने के लिए 290 करोड़ रुपये खर्च किए गए।  इस रेलवे लाइन के निर्माण से सुल्तानगंज, असरगंज, तारापुर, बेलहर और देवघर को सीधे कनेक्टिविटी मिलेगी।

सुगौली-वाल्मीकिनगर रेलवे परियोजना का दोहरीकरण

उधर, सुगौली-वाल्मीकिनगर रेलखंड का दोहरीकरण कार्य चल रहा है, जो 110 किलोमीटर लंबा है।  83 किलोमीटर लंबे इसके रेलखंड का काम पूरा हो चुका है।  इसके अलावा, परियोजना के तहत बेतिया-कुमारबाग रेलवे लाइन का दोहरीकरण कार्य जारी है, जो 9 किलोमीटर है।  इसके पूरा होने से रेलवे की संख्या बढ़ जाएगी। एक्सप्रेस गाड़ियों को संबंधित स्टेशनों पर ठहराया जाएगा, जिससे सभी यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। वाल्मीकिनगर, चंद्रपुर, कालूबथान, कटलीचेरा, बरपथार, हण्डपा, परसा खेड़ा, पाच्छापुर, बेलदा, गंगाधर, नागौर, सिलौत और कपूरपुरा स्टेशनों को बनाया जाएगा. सुगौली जंक्शन भी शामिल होगा।

विक्रमशिला-कटारिया की नई दोहरी लाइन की लंबाई

विक्रमशिला-कटारिया न्यू डबल लाइन ब्रिज, जो भागलपुर के पास गंगा पर 26.23 किलोमीटर लंबा है, भी मंजूर किया गया था। इस रेलवे को बनाने का काम अभी जारी है। निर्माण एजेंसी को भी टेंडर मिल गए।  फिलहाल, विक्रमशिला-कटारिया नई दोहरी लाइन का काम अभी भी जारी है। डीएम ने पूर्व मध्य रेलवे को सर्किल रेट से 200 हेक्टेयर जमीन देने का आदेश दिया है।

विक्रमशिला-कटारिया में नवीनतम डबल लाइन की लागत

विक्रमशिला-कटारिया न्यू डबल लाइन पर 2.44 किलोमीटर का डबल पुल गंगा नदी पर बनेगा। सरकार इसके लिए 2549.17 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बिहार और झारखंड के बीच इस लाइन से आसान यात्रा होगी।  साथ ही पूर्वी बिहार और कोसी क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी।  इस अभियान को वर्ष 2030 से वर्ष 31 तक पूरा करने का लक्ष्य है।  इस परियोजना के पूरा होने पर यात्रियों को संबंधित स्टेशनों से बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। यह कटारिया व नवगछिया को उत्तर में और विक्रमशिला व शिवनारायणपुर को दक्षिण में जोड़ेगा।

बिहार में आएगी आर्थिक समृद्ध

नई रेल लाइनों से गांवों और आसपास के कस्बों और शहरों में व्यापार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।  किसान यात्रा करके अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचा सकेंगे।  इससे कृषि क्षेत्र और गांवों की आय दोनों बढ़ जाएगी।  रेल परियोजनाओं में मालगाड़ी, एक्सप्रेस और स्थानीय पैसेंजर गाड़ियां होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को ट्रेन से आसानी होगी और दूर स्टेशनों पर जाकर ट्रेनों का इंतजार नहीं करना होगा।