The Chopal
Rice Production: भारत में धान उत्पादन घटने का डर, वैश्विक चावल बाजार में टूटे चावल की मांग में बढ़ोतरी
 

देश में इस बार मानसून की स्थिति से कई चावल उत्पादक राज्यों में इस बार चावल की खेती काफी प्रभावित हुई है। संभवत जिसका उत्पादन पर असर होगा। तो उत्पादन में गिरावट की आशंका के चलते भारतीय बाजार में हाल में जारी उस रिपोर्ट ने तहलका भी मचा दिया था जिसमें कहा गया था कि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही है. बता दे कि अभी तक इस संभावित खबर पर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक निर्णय भी नहीं लिया गया है. जानकारी के लिए ब दे कि वैश्विक चावल बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 % है, तो ऐसे में चावल निर्यात पर प्रतिबंध की सभावना से बाजार में तहलका मचना लगभग तय है.

हाल ही में एक अंग्रेजी वेबसाइट एसपीग्लोबल के अनुसार एक विक्रेता ने बताया कि उसने टूटे चावल की पेशकश को ठुकरा दिया क्योंकि इससे उत्पाद जल्द प्रतिबंधित हो जाएगा. जबकि एक दूसरे निर्यातक ने निर्यात प्रतिबंधों को लेकर कहा कि कुछ भी हो सकता है. हालांकि सही जवाब किसी के पास नहीं था. हालांकि इस साल ऐसी खबरों को हवा भी मिल सकती है क्योंकि देश में खरीफ के मौसम में सबसे ज्यादा धान की खेती भी होती है, पर इस बारदेश के कई चावल उत्पादक राज्यों में मानसून बारिश की देरी और अनियमितता के कारण प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में धान की बुवाई पर काफी असर भी पड़ा है.

इस साल चावल की 6 फीसदी कम हुई बुवाई

देश के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त तक, देश में कुल रोपण क्षेत्र 36.8 मिलियन हेक्टेयर तक था, जो इस वर्ष 6 % कम और औसत से 7.4 % कम है. हालांकि मिलिंग प्रक्रिया के बाद टूटा हुआ चावल बचता है, अच्छा चावल अलग निकल जाता है. लेकिन रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण उत्पन्न हुआ खाद्य संकट ने स्टॉक देखने पर भी मजबूर कर दिया है. युद्ध के कारण खाद्य आपूर्ति पर इन देशों ने अंकुश लगा दिया है, और टूटे हुए चावल की बहुत अधिक मांग को बढ़ाने का कार्य भी कर दिया है.

इस बार प्रभावित हुई है धान की खेती

उल्लेखनीय है कि इस बार देश के कई हिस्सों में मानसुनी बारिश की अनियमितता के कारण खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है. धान की खेती पर सबसे ज्यादा असर भी पड़ा है. पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार जैसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में धान की खेती का रकबा भी घटा है. वहीं दूसरे तरफ सरकार ने इस साल धान खरीद का लक्ष्य पिछले साल की तुलना में थोड़ा ज्यादा ही रखा है.

पड़ोसी चीन भी खरीद रहा है टूटा चावल

चीन और वियतनाम सहित प्रमुख भोजन के खरीदारों ने बाद में भारतीय टूटे हुए चावल की भी भारी मात्रा में खरीदी की है, जबकि घरेलू फ़ीड उद्योग की मांग में भी वृद्धि भी हुई है. चीन भारतीय चावल का पारंपरिक खरीदार भी नहीं है, लेकिन 2022 में एक प्रमुख खरीदार के रूप में भी बदल गया है. उदाहरण के लिए, चीन गैर-बासमती चावल के लिए जून में 314,485 मिलियन टन तक का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था.