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Electric Tractor: हरियाणा के HU में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बनकर हुआ तैयार, किसानों की आमदनी करेगा डबल
 

Electric Tractor HU Haryana: हरियाणा के जिले हिसार में ई-ट्रैक्टर तैयार किया गया है जो किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा. महंगे डीजल पर खर्च घटाने और बढ़ते प्रदूषण को पर लगाम लगाने में इसके बेहतर परिणाम निकल कर सामने आएंगे. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार (HU) के कृषि इंजीनियरिंग v प्रौद्योगिकी कालेज ने इस ई-ट्रेक्टर को तैयार किया है. प्राइवेट कंपनीयां तो पहले से इन प्रयोग पर काम कर रही है. लेकिन पहली बार किसी सरकारी संस्थान ने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बनाया है. इस ई-ट्रैक्टर को चलाने की लागत डीजल ट्रैक्टर के मुकाबले 32 प्रतिशत कम आएगी.

आवाज़ व कंपन भी बेहद कम 

लीथियम बैटरी से चालित इस ई-ट्रैक्टर की एक खास बात है की आम ट्रैक्टर से 52 प्रतिशत कम कंपन करता है. इसकी आवाज़ यानि की शोर में 80 प्रतिशत तक कमी. यह शोर BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) कोड की अधिकतम अनुमेय सीमा से कम है. वैज्ञानिकों का प्रयास है की इस ई-ट्रैक्टर की आवाज बिलकुल समाप्त किया जाए ताकि किसी भी तरह का शोर ना करें. परंतु शोध में पाया गया कि यूरोपीय देशों में जब बिना किसी आवाज के ई-ट्रैक्टर सड़क पर चलाए गए तो हादसे हुए. थोड़ी आवाज़ का यह फायदा है की इंसान वाहन की आवाज पर सचेत हो जातें है. 

80 किमी तक की लिमिट

16.2 किलोवाट की बैटरी से चलने वाला यह ई-ट्रैक्टर लगातार 5 घंटे तक सफर कर सकता है. साथ ही फुल चार्ज में 80 किलोमीटर चलेगा. यह 23.17 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलने वाला ई-ट्रैक्टर 1.5 टन वजन लेकर चल सकता है. फ़ास्ट चार्जर से चार घंटे में ही यह बैटरी फुल चार्ज हो जाती है. इस दौरान 19 से 20 यूनिट बिजली की खपत होती है. HU के विज्ञानी अब इस ट्रैक्टर का बैकअप 8 से 9 घंटे तक ले जाना चाहते हैं. इस पर शोध जारी है.

खेती में सहायक यह ई-ट्रैक्टर 

डीजल ट्रैक्टर कई तरह के अलग-अलग हार्सपावर के आते हैं. इस ई-ट्रैक्टर क्षमता 16 हार्स पावर की है. 16 हार्स पावर का डीजल ट्रैक्टर खेती के कार्य करता है वह सभी कार्य यह ई-ट्रैक्टर विकास करने की क्षमता रखता है. इससे खेती के प्रमुख कार्यों मसलन जोताई, बोआई, पलेवा और थ्रेसिंग आदि के काम भी आसानी से किए जा सकते हैं. अभी तक इस ई- ट्रैक्टर की कीमत 6 लाख रुपये है. मगर इंजीनियर्स ने कहां की ज्यादा संख्या बनाया जाएगा तो लागत को काफी कम किया जा सकता है.

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार

किसी सरकारी संस्थान ने पहली बार ई-ट्रैक्टर तैयार किया है. पर्यावरण को सुरक्षित रखने व किसानों की लागत को कम करने के उद्देश्य से ई-ट्रैक्टर पर हमने कार्य शुरू किया था. अब ई-ट्रैक्टर बनकर तैयार है. आगे इसे हम इसकी क्षमता में विस्तार कर और भी उपयोगी बना रहे हैं. आने वाले समय में यह 8 से 9 घंटे लगातार चल सकेगा.

- प्रो बीआर कांबोज, कृलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, जिला हिसार (हरियाणा)

उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान के अनुसार

इस ई-ट्रैक्टर को हम लांच कर चुके हैं. इसके प्रमाणीकरण के लिए मध्य प्रदेश में केंद्रीय फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान भेजा जाएगा. हमारा प्रयास है कि इस वर्ष के अंत तक ई-ट्रैक्टर को बाजार में लाया जाए.

- डा. मुकेश जैन, निदेशक, उत्तरी क्षेत्र कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, हिसार

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