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Edible Oil Price: खाद्य तेलों में राहत का दौर जारी, जानें सभी तेलों के ताजा दाम

 

The Chopal, नई दिल्ली- महंगाई की मार के बीच आम आदमी के लिए राहत भरी खबर आ रही है. बीते सप्ताह दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में को सोयाबीन डीगम तेल, कच्चा पामतेल (CPO) और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट का रुख रहा. और सरसों, मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल और बिनौला तेल के दाम पूर्वस्तर पर कारोबार करते हुए बंद हुए.

बाजार सूत्रों ने बताया कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.75 % की गिरावट जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में 1.7 % तक की गिरावट रही. सूत्रों ने बताया कि विदेशों में एक बार फिर से दाम टूटे हैं और इससे खुश होने के बजाय सभी को चिंता करने की जरुरत भी है क्योंकि यह देश के तेल तिलहन कारोबार की कमर को तोड़ रहा है. समय रहते अगर सरकार ने विशेषकर हल्के तेलों पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया तो देशी तिलहन (आगामी सरसों एवं पहले के सोयाबीन तिलहन) बाजार में खपेंगे नहीं और इसका बड़ा स्टॉक देश में जमा हो जाएगा.

अभी पामोलीन सस्ता मिलना जारी रहने की उम्मीद

सूत्रों ने बताया कि यह हमारे आत्मनिर्भर होने के सपने को ध्वस्त भी कर देगा. इस मामले में समय रहते कदम उठाने की जरूरत है. अगर स्टॉक बाजार में खपा नहीं तो देश के किसान आगे कैसे तिलहन खेती कर पाएंगे? उन्होंने कहा कि देश के कम आय वर्ग के लोगों में पामोलीन की खपत भी है जो उन्हें सस्ता मिलना जारी रहने की उम्मीद भी है पर थोड़ा समृद्ध परिवार हल्के तेलों में सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और बिनौला जैसे तेल अधिक खाते हैं. इसलिए केवल हल्के तेलों के अंधाधुंध सस्ते आयात को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है ताकि देश के किसान हितों को कोई नुकसान न पहुंचे. संभव हो तो डब्ल्यूटीओ की शुल्क लगाने की जो अधिकतम सीमा है, वहां तक हल्के तेलों पर आयात शुल्क लगाने के बारे में भी सोचना चाहिए.

दूध, अंडे, चिकेन और मक्खन के दाम टूटेंगे 

सूत्रों ने आगे कहा कि देशी तेल तिलहनों की तेजी को MRP की मुस्तैद निगरानी और इसे दुरुस्त करते हुए ठीक भी किया जा सकता है. इसके अलावा शुल्क लगाने से तेलों के दाम सस्ते भी होंगे क्योंकि देशी तिलहन से हमें खल और डीआयल्ड केक (DOC) भी सस्ता मिलेगा जिससे दूध, अंडे, चिकेन और मक्खन के दाम अब कम हो सकते हैं. सबसे बड़ी बात देशी पेराई मिलें पूरी क्षमता से काम करेंगी और लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही साथ महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा का खर्च भी कुछ कम होगा.

सस्ते आयात का दवाब होने के बावजूद हल्की फुल्की मांग के बीच सरसों, मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, बिनौला तेल और सोयाबीन तिलहन के दाम पूर्ववत तक रहे. दूसरी ओर विदेशी बाजारों में गिरावट का रुख रहने से सीपीओ, पामोलीन और सोयाबीन डीगम तेल में भी गिरावट आई.

आज तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,695-6,745 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल तक 
मूंगफली – 6,675-6,735 रुपये प्रति क्विंटल तक 
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,780 रुपये प्रति क्विंटल तक 
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,490-2,755 रुपये प्रति टिन
सरसों तेल दादरी- 13,400 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सरसों पक्की घानी- 2,040-2,170 रुपये प्रति टिन
सरसों कच्ची घानी- 2,100-2,225 रुपये प्रति टिन
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,600 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल तक 
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,800 रुपये प्रति क्विंटल तक 
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल तक 
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,050 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल तक 
सोयाबीन दाना – 5,575-5,675 रुपये प्रति क्विंटल तक 
सोयाबीन लूज- 5,320-5,340 रुपये प्रति क्विंटल तक 
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल तक 

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