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भारत के हर घर में होगी अब इम्पोर्टेड गाड़ी, जल्द होने वाली हैं यह सबसे बड़ी डील

ब्रिटेन से आने वाली महंगी कारें भारत में जल्द ही सस्ती हो सकती हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच इस साल दिवाली से पहले मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने की पूरी संभावना है। इस कृषि परियोजना से कृषि उत्पादों, लेदर और ऑटोमोबाइल सहित कई सामान दोनों देशों में निर्यात किए जाएंगे।
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Expensive cars coming from Britain may soon become cheaper in India

The Chopal - ब्रिटेन से आने वाली महंगी कारें भारत में जल्द ही सस्ती हो सकती हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच इस साल दिवाली से पहले मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने की पूरी संभावना है। इस कृषि परियोजना से कृषि उत्पादों, लेदर और ऑटोमोबाइल सहित कई सामान दोनों देशों में निर्यात किए जाएंगे। FTAA के तहत, दोनों देशों ने एक दूसरे देश से आने वाले माल पर सीमा शुल्क (Import Duty) को कम करेंगे या पूरी तरह समाप्त कर देंगे। भारत और ब्रिटेन ने वित्त वर्ष 2022-2023 में 20 अरब डॉलर का व्यापार किया था। इस दौरान भारत ने 11.41 अरब डॉलर की वस्तुएं ब्रिटेन को निर्यात कीं।

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक इस महीने के अंत में भारत का दौरा करेंगे। एफटीए पर उनके भारत दौरे पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है। इस समझौते के परिणामस्वरूप भारत ब्रिटेन से आने वाली लग्जरी गाड़ियों पर सीमा शुल्क को कम करने को तैयार है। ब्रिटेन से भारत आने वाली 1500 सीसी की लग्जरी कार पर 100 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया गया है। गाड़ियों पर 240 प्रतिशत का कर लगाया जाता है, जो अन्य करों और सेस के साथ मिलाकर है।

इम्पोर्टेड वाहनों पर टैक्स कम होगा

रिपोर्टों के अनुसार, गाड़ियों पर लगने वाले मूल सीमा शुल्क को पच्चीस प्रतिशत तक बढ़ाने पर समझौता हुआ है। वहीं 1500 सीसी से कम क्षमता वाले वाहनों पर सीमा शुल्क 60 प्रतिशत है, जो बाद में 30 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ऐसा होने पर लैंड रोवर, जगुआर, बेंटले, रोल्स रॉयस और एस्टन मार्टिन जैसी ब्रिटेन से भारत आने वाली लग्जरी कारें सस्ती हो सकती हैं।

बातचीत अंतिम चरण में है

वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों देशों के बीच एफटीए वार्ताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो काफी समय से चल रही है। उनका कहना था कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति हुई है और कुछ मुद्दों पर वार्ता जारी है। दोनों देशों के बीच व्यापक रूप से असहमति वाले मुद्दों पर समझौता करने के लिए उच्चस्तरीय प्रयास चल रहे हैं।

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